बुधवार, 19 मई 2010

अपने घर की बात छवियों द्वारा

मेरा वर्तमान और पैतृक निवास जिसने मेरा बचपन सींचा

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 मेरा छोटा सा पुस्तक संग्रह और मेरा लैपटाप

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घर के पिछवाड़े मे बसी सब्जियों की बगिया

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मेरी कर्मभूमि मेरे खेत-खलियान

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मेरी प्यारी गायें

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मेरे सबसे प्यारे दोस्त

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फूलों की बगिया

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13 टिप्‍पणियां:

  1. रोचक और जानकारी को चित्रों के द्वारा प्रस्तुत करती पोस्ट / विचारणीय प्रस्तुती /

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  2. वाह-वाह क्या बात है। क्या बात है... क्या बात है...
    वाकई क्या बात है।
    आपके चित्रों को देखकर लग है कि सब कुछ आपने ही ने खींचे है।
    कमाल की जानकारी। पूरे विश्व को आपने एक नई जानकारी दी। विश्व आपका आभारी रहेगा। समूची मानवता आपकी ऋणी रहेगी।

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  3. मित्र जलजला जी आपने अपनी टिप्पणी मे मेरी पोस्ट की जो प्रशंसा की है वह वास्तव मे मेरी आप पर लिखी पोस्ट का प्रत्युत्तर है जो आपने भावनावश लिखी है पर मेरी भी बात सुन लीजिए 'भाले की नोक पर' जो आपके ब्लॉग का शीर्षक है उसपर एक उम्दा पोस्ट लगाइए ताकि आप अपनी ऊर्जा का एक सकारात्मक उपयोग कर सकेंगे। शेष आपकी इच्छा आप स्वयं ज्ञानी हैं बाँकी मैं तो महामूर्खराज ठहरा। सादर धन्यवाद

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  4. बार-बार चित्रों को निहारने का मन कर रहा है। क्या बात है। क्या बात है। लगता है चित्रों की एक प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए। एक बार फिर आपको बधाई। इतना नेचुरल चित्र तो मैंने जिन्दगी में कभी नहीं देखा। आप हमेशा आगे बढ़े और विश्व में छा जाए। आप कभी भी फोटोग्राफी का दामन मत छोडि़एगा। फोटग्राफी और आप एक दूसरे के लिए ही बने हैं शायद। आपकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा की ओर है। फिर आता हूं।

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  5. मित्र जलजला जी मैं हमेशा समय के अभाव से ग्रसित रहता हूँ तो आगे से शायद आपकी टिप्पणियों का जबाब ना दे सकूँ इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। आपको टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद क्योंकि आपकी टिप्पणियाँ मुझे मुस्कुराने पर बाध्य कर देती है।

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  6. very nice pics -- aapane to gaanv ki yaad dila di ....yaar aap to intelligent ho ..kisane kahaa murkhraj :-)

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  7. आपके गांव तो घूमने आना पड़ेगा भाई अब!! जब भारत आये तो आपसे बात की जायेगी. :)

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  8. जलजला ने आज तक किसी रूलाया भी नहीं.
    आप जलजला को ठीक से नहीं समझ सकें तो उसका क्या कसूर
    चलिए आपने मित्र माना तो सही
    आपको धन्यवाद.
    अब मैं तब ही आऊंगा जब आप दूसरो के कहने या दबाव में आकर मेरे ऊपर फिर कोई पोस्ट लिखेंगे.

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  9. घरे का याद आ गया... सहेजकर रखिये, जेतना तेजी से गाँव सहर बन रहा है, ई सब लड़िक्न सब को देखा कर बतना पड़ेगा कि गाँव किसको कहते हैं..

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  10. भई हम तो शहर में रहते हैं और खेत-खलिहान कभी कभी ही देख पाते हैं.आपने हमारे साथ आपकी कर्मभूमि साझा की उसके लिये धन्यवाद.यह पोस्ट अच्छा लगा

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  11. Superb pictures and looks like a village, Thanks a lot for sharing these pics here.

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